Monday, July 21, 2014

तेरी याद

एक नमी सी मेरी आँखों में तुझ से दूर होकर रहती है
एक कमी सी है मेरे जीवन में जो मुझसे ये कहती है
के तुझ बिन कैसे जी रही हूँ कैसे सांस लेती हूँ
क्यूँ हर पल मैं तेरी यादों का दामन थाम लेती हूँ
मीलों का फासला है हमारे बीच फिर भी ये जुडाव कैसा
आँखों को रोशन करता है मेरी ये इश्क का उजाला कैसा
मन की मन से डोर बांध गयी बिना कुछ कहे ही
क्या कहूँ तुझसे जब तू मुझसे  कभी मिला ही नहीं
एक आस है तुझसे मिलने की इस दिल में एक विश्वास है
मुझसे मिलेगा तु शायद इस बात का हरपल अहसास है
कुछ नहीं कहूँगी तुझसे मिलकर मैं मौन रहूंगी
बस अपनी ख़ामोशी से ही मई सब कुछ कहूँगी
समझ लेना तुम मेरे नैनो की मूक भाषा
और दे देना नैनो से सी मेरे दिल को दिलासा
राखी शर्मा

Thursday, July 17, 2014

बारिश और तुम

आज जैसे ही पानी बरसा और बूँदें मुझे  छूने लगी
बरबस तेरी यादें ने मुझे घेर लिया अपनी बाहों में
तेरे पहलु में बिताये वो बीते पल याद आने लगे
मेरे इस दिल की बगिया के फूल मुस्कुराने लगे
वो तुम्हारा प्यारा स्पर्श बहुत याद आया मुझे
तुम्हारी उन अटखेलियों ने बहुत सताया मुझे
इतने बातूनी तो नहीं तुम जितनी की मैं हूँ
इतने शरारती भी नहीं हो तुम जितनी मैं हूँ
एक सादगी है तुम में जो मुझे तुम्हारी ओर खीचती है
तुम्हारे प्यार पेड जो मेरे दिल में है उसे वो सींचती है
तुम्हारी खामोश निगाहों  की भाषा पढ़ लेती हूँ मैं
तुम्हारे बिन बोले ही सबकुछ समझ लेती हूँ मैं
तुम्हारे साथ बिताये कुछ पल भुलाये नहीं जाते
उन हसीं लम्हों के वो मंजर दिल से मिटाए नहीं जाते
तुम्हारे साथ चाय की चुस्कियां याद आती है
बारिश में साथ चले जब वो खामोशियाँ याद आती हैं
थोडा ही सही वो मुकम्मल जहाँ तो मिला मेरे प्यार को
एक टुकड़ा प्यार मिला मेरी जिन्दगी के जहाँ को
ये रूहानी प्यार अब मैं भी महसूस करती हूँ
कुछ पल साथ बैठ बात करने को मैं भी तरसती हूँ।
राखी

Friday, June 27, 2014

ये रात अँधेरी

ये रात कितनी अँधेरी है जाने क्यों
चाँद और धरती में इतनी दूरी है
काश के मिट जाते सब फासले
तुजसे दूर रहकर पिघलती रूह मेरी है।
रफ्ता रफ्ता लम्हे गुज़रते हैं
हम तिल तिल यूँही मरते हैं
काश के रूह मेरी आज़ाद हो जाये
तेरे प्यार में क़ैद हम तरसते है
कुछ नहीं है दरमियान बस
एक आस के ही बाकि  है
तुझसे मिलने का अरमानो में
एक ख्वाब ही बाकी है।
तेरा पता पूछते फिरते है
बदहवास से हम और
जाने कहाँ कहाँ फिरते है
तेरी तलाश में  हम
तू नजर नहीं आता न
कोई सुराग मिलता है
हो गए हैं जिन्दगी में उदास
और परेशान से हम
न रोग मिटता है हमारा
न मौत आती है
जिन्दगी बस हमे ठोकर
ही दिलाती है
काश के मिल जायें कुछ
हसीं लम्हे हमे
कैसे भूले तुझे के आज भी
तेरी याद आके हमे
बहुत तडपती है।
राखी
 

Wednesday, May 28, 2014

अनोखा अनुभव

सुना है क्या तुमने कभी ये
पत्थर भी आवाज़ लगाते हैं
ये ठूंठ खड़े पहाड़ भी हमे
अपने पास बुलाते है
कभी  जाकर तो देखो दोस्तों
प्रकृति की उस गोद में जहाँ
बाहें पासरे ये पेड खड़े है
तुम्हारे इंतज़ार में
कभी बैठो कुछ देर किसी झील
के किनारे और निहारो आकाश
में उड़ते पंछियों को
कितना सुखद अहसास है
एक अलग ही आकर्षण है प्रकृति
की गोद में
चढो कभी पहाड़ों पर ऊँची नीची
पगडंडियों से और देखो
नजारा उपर से धरती का
कैसा मनमोहक अहसास है
कैसा ये अनुभव जो मुझे बार
आकर्षित करता है अपनी और
और मैं खिची चली आती हु
बिना किसी डोर।

Monday, May 19, 2014

मेरी किताब

आँखों में सपने  सुनहरे सजाने लगी हु मैं
क्यों आजकल अकेले में मुस्कुराने लगी हु मैं
मेरा हर ख्वाब तुझसे जुड़ गया है मेरी किताब
तुझे अपने दिल के और पास लाने लगी हु  मैं

जब भी कलम चलती है मेरी तुझ पे लिखने
स्याही से ख्वाब उकेरने लगी हु मैं
लिखे हुए शब्दों को फिर से सहेजकर
माला की तरह पिरोने लगी हूँ मैं

तू एक बच्चे की तरह हो गयी है मेरे
जिस वक़्त बेवक्त गोद में उठाये फिरती हूँ मैं
और जब कभी मन करता है खेलने का
कलम से पन्नो पर खेलने लगी हूँ मैं

मुझे तेरी आदत सी हो गयी है ऐसी
एक प्रेयसी की तरह तुझे प्रेम करने लगी हु मैं
और तुझे अपने पास न पाकर जाने क्यू
अधीर और चिंतित सी होने लगी हूँ मैं

बस अब जिन्दगी कटेगी तेरे साथ मेरी
और उस जिन्दगी को अभी से सोचने लगी हूँ मैं
अब तो तुझसे जुदाई मुश्किल है तुझसे
तेरे साथ हर लम्हा जीने लगी हूँ मैं


Friday, May 9, 2014

मेरी शादी

घर में मेरी शादी की बाते होने लगी थी
और मैं भी नए सपने सजोने लगी थी
मुझे देखने लड़के वाले आ रहे थे
सब अपने अपने कयास लगा रहे थे
सबकी बाते सुनती थी और चुप थी मैं
सोचती रहती थी की क्या करुँगी मैं
मुझको सब पाठ पड़ा रहे थे लगा ऐसे
जैसे वो सामान खरीदने आ रहे थे
वो दिन जब लड़का देखने आया
मुझे डर ने बहुत दिर तक सताया
पर फिर हिम्मत आई न जाने कहाँ से
मैं भी चल दी चुप चाप वहां से
सामने जाके बैठ गयो उनके मैं भी
लड़के ने कुछ भी न पूछा पर मैं बोली
मैंने ही अपनी जबान पहले खोली
कुछ बातों के बाद मैं अंदर चली गयी
डर के मारे मेरी दिल की धड़कन बढ़ गयी
पता चला की शादी की हाँ हो गयी
कल तक जो मैं थी आज वो दुल्हन बन गयी
मेरे घर को सजाया जा रहा था
सामान शादी का लाया जा रहा था
मन भी नयी दुनिया को सोचता था
पिया के घर का सपना हरसू देखता था
हल्दी जब मुझको लगायी जा रही थी
होंटो पे मुस्कान आई जा रही थी
भाभी कर रही थी मुझसे ठिठोली
और मैं हो रही थी अब यहाँ अकेली
सुर्ख जोड़ा मुझको पहनाया जा रहा था
सोलह श्रृंगार भी मेरा किया जा रहा था
आँखों में मेरी एक चमक सी आ गयी थी
चुनरी मेरी अब भी लहरा रही थी
दुल्हन जब मुझको बनाया जा रहा था
सुरूर सा दिल पे मेरे छाया जा रहा था
आई जब वरमाला लेके मैं दर पे अपने
तब पिया को देख न पायी
लाज लगी मुजको कुछ इस तरह की
अंखियों को अपनी उठा ही न पाई
फेरो पर पिया संग बैठी घबराई हुई
थोडा दरी थोडा सकुचाई हुई मैं
कन्यादान मेरा किया जा रहा था
बाबा का घर अब छुटा जा रहा था
साथ फेरे लिए मैंने पिया संग अपने
मन में सजा के कुछ कोमल सपने
मुझे डोली में बैठाया जा रहा था
घर से विदा अब किया जा रहा था
इस देहरी पे मेने अपना बच्पन बिताया
और अब पिया और उसके घर को अपनाया
छोड़ चली मैं अपने बाबा के घर को
अपना लिया अपने सजन सांवरे को।


Saturday, May 3, 2014

हमारा प्यार

बीत रही है मेरी जिन्दगी तेरी पलकों की छाँवओन में
तू दूर है तो क्या पर अब भी महसूस करते है खुद को तेरी बाँहों में
कभीसोचा की तेरे करीब आ जाऊ मैं
फिर सोचा की ऐसे ही रह जाऊ मैं
और आलम ऐ तन्हाई भी हमे याद तेरी दिलाती है
तू तो आता नहीं है पर आँखे राहों पे बिछ जाती हैं
करती है जिन्दगी मुझपे सितम के
ये तुझसे दूर मुझको क्यों रखती है
छोटे से मेरे दिल आजकल जाने क्यों
बड़ी बड़ी ख्वाइश मचलती है
माना मैंने की हम नदी के दो किनारे है                             पर हमे जो साथ जोड़े हुए है वो
हमारे प्यार की बौछारें है