Sunday, January 18, 2015

कलम है बेताब

मेरी कलम आज बेताब है महबूब लिखने को
फिर से वो कोशिश कर रही स्याही से शब्द उकेरने को
कागज़ जे खाके में वो भर रही है स्याही से अल्फ़ाज़
कर रही है कोशिश आज फिर आखरों से तेरी तस्वीर बनाने को
तन्हाई में ये ज़ुल्म अपने पे रोज़ कर लेती है तुझसे रूबरू होने को
हर बार ढूंढती है तुझे अपने ही शब्दों में बात करने को
कैसे इसके मन में आया तुझे कागज़ पे गढ़ने को
क्यों ये ही आज आतुर हो गयी तुझसे मिलने को
कुछ कहने से पहले ही खुद ही चल पड़ी लिखने को
मन किया मेरा भी सुबह सुबह तेरी आँखे पढ़ने को
क्या करती कलम से गुज़ारिश की तेरी तस्वीर बनाने को
बस मुक्म्मल से कुछ शब्द लिख डाले तेरी तारीफ
करने को ।
राखी शर्मा

Wednesday, January 14, 2015

रूह की तड़प

स्याह रातों में मेरी रूह निकल जाती है
मेरे जिस्म से
तेरी तलाश में और पहुँच जाती है तेरे पास
तुझे बैठ कर निहारती है वो रोज़ क्योंकि
जब ऐसा होता है न मेरा जिस्म महकता है
शायद ये मुझे अहसास कराता है कि
तेरी क्या जगह है मेरी बेमानी सी जिंदगी में
सुबह होते ही लौट आती है वापस मेरी रूह
और फिर से उसे इंतज़ार रहता है शाम का
क्योंकि जो सुकून तेरे दीदार मिलता है न उसे
वो शायद कहीं भी महसूस नहीं करती वो भी
मेरी ही तरह तेरे दीदार को तरसती है ।
राखी शर्मा

Thursday, January 1, 2015

मेरा इश्क़

बेज़ुबान है इश्क़ मेरा समझना है तो दिल के जज़्बात समझ
कैसे करूँ बयान ऐ मोहब्बत तू कभी तो मेरे अहसास समझ
खलिश नहीं मुझे कोई न ही कोई शिकवा तुझसे है
मेरे लिखे अल्फ़ाज़ों की तू कभी तो ज़बान समझ

ज़ात ही मेरी कुछ ऐसा है कि मैं हल्फ़ कैसे उठाऊ मौला
कैसे खुद को तेरे इश्क़ के मुक़दमे से बचाऊं मौला
कैद है ज़िन्दगी मेरी तेरी आँखो के कारागार में
कैसे इसकी सलाखों को मैं  तोड़ के आज़ाद हो जाउँ मौला

गज़ब ये मेरी आज कल तासीर हो गयी है
तेरे दीदार की तलब बड़ी ही गहरी हो गयी है
कैसे इन आँखों में तेरी प्यास को बुझाऊँ
मुझसे ज्यादा मुझे तेरी ज़िन्दगी प्यारी हो गयी है

गमगीन मेरी मोहब्बत का फ़साना हो गया है
मेरा ये नाज़ुक सा दिल तेरी अदाओं का दीवाना हो गया है
रश्क़ है अब मुझे खुद की मोहब्बत पर क्योंकि
बड़ा ही दिलकश अपना फ़साना हो गया है।

राखी शर्मा

औरत की कहानी

कैसी ये औरत की कहानी है है मोहब्बत भी करती है औरों से भी छुपानी है
हाथों में फूल लेकर सोचती है कि क्या ये भी उसी की तरह कमजोरी की निशानी है
हर दुःख हर सुख में मुस्कुराती ही रहती वो उफ्फ्फ करे भी तो कोई नहीं सुनता
हर तरफ कहीं भी देखो चाहे औरत ही भुगत रही सब कुछ ये हर औरत की जुबानी है।
रब ने ही औरत को इतना सहनशील बनाया लबों पे हँसी और आँखों में पानी है ।
जब भी सुनती हूँ किसी औरत की दास्ताँ लगता है मुझे ये मेरी ही कहानी है ।
राखी शर्मा

Sunday, December 28, 2014

अब मैं लिखना सीख गयी हु


एक बात है जो कहनी है मुझे तुझसे
की तेरी ही तरबियत का असर है ये
जो मैं  कुछ लिखना सीख गयी हूँ
मुझे न तो शब्दों का पता है न उनकी समझ
पर उनको कविता की माला में पिरोना सीख गयी हूँ
कुछ तो तेरी रहमत है मुझ पर कुछ मेरा हुनर है
मैं अहसासों की लडिया बना सीख गयी हूँ
मैं एक अदना सी औरत कैसे किस तरह ये
शब्दों का ये रंगीन जादू करना सीख गयी हूँ
तुझे अहसास नहीं है पर ज़र्रा हूँ मैं इस माटी
और ज़र्रा ज़र्रा जोड़ जोड़ के महल बनाना जान गयी हूँ
करती हूँ बेबाक बातें औरअनकही बातें जाने अनजाने
उन बातों का मतलब क्या है अब  मैं पहचान गयी हूँ
मैं हल्का हो जाता मेरा जब तुझसे बात करूँ मैं
तूने ही मुझसे कहा था कहना तेरा मान गयी हूँ
बस ऐसे ही मुझसे तू यूँही जुडी रहना अब
स्नेह लुटाना माँ यूँही तेरी बाहों में आ जो गयी हूँ ।
राखी शर्मा

Wednesday, December 17, 2014

कैसी हैवानियत

कैसा जिहाद कैसे ज़िहादी इन्होंने तो इंसानियत की सीमा लांघ दी
आज क्यों है पाकिस्तान इतना ग़मगीन इन्होंने ही तो अपने घर इन्हें पनाह दी
हमेशा इसने हौसला ही बढ़ाया है इन आतंकियों का
आज इन पर पड़ी तो इन्होंने अपने आँखे गीली कर दी
भूल गए क्या 26/11 हम कैसे भूलते इनकी जो करतूत थी
संसद पे जो हमला कराया वो भी तो इन्ही की एक भूल थी
वो हम ही हिंदुस्तानी हैं जिनको गम है इनके मासूम के मरने का
नहीं तो इनकी इंसानियत तो चादर ओढ़ कर कहीं दूर जाकर सो रही
अब आँख न खुली इनकी तो लानत है इनपर और दो पनाह इन हैवानो को
तुम्हे तुम्हारे ही देश में मार डालेंगे ये आतंकी तोड़ डालेंगे तुम्हारे मकानों को
अब भी समय है सभल जाओ अब तो इनका साथ न दो इन्हें मिलकर मार गिराओ
अपने पैर की बेवाइ फटी तो हुआ न दर्द हम भी ये दर्द हरसू झेलते हैं
पल अपनों को खोने का दंश क्या होता है हम भी इसी को सोचते हैं
दुखद है ये जी उ होने मासूमों को मार डाला उन्होंने अपनी बुज़दिली का सबूत दे डाला।
राखी शर्मा

Friday, December 12, 2014

आ कहीं खो जाएं

आ मिल के हम दोनों साथ बैठ जाएं
नए ख्वाब कोई जिंदगी से चुन लाएं
एक दूसरे की बाँहों में कुछ यूँ खो जाएं
दुनिया से हम आज बेखबर हो जाएं
तू और में प्यार की धुन कोई गुनगुनाएं
सांसों से साँसे  रूह से रूह मिल जाए
आ मिल के हम प्यार का फूल अपने
इस दिल के चमन में खिलाएं
तू तू न रहे मैं मैं न रहूँ बस
मिलकर हम एक हो जाएं
आ आज प्यार को एक नई रह दिखाएँ
एक दूजे में हम कुछ यूँ खो जाएं
राखी शर्मा