Monday, September 29, 2014

तुमसे बिछड़ने के बाद

तुमसे बिछड़ने  के बाद

क्या कहु क्या हाल हुआ जीना मेरा मुहाल हुआ
तुमसे बिछड़ने के बाद मेरा कितना बुरा हाल हुआ
जिन्दगी में एक कमी सी रह गयी
आँखों में नमी सी रह गयी
मेरी किस्मत और मेरे मन में भी एक बवाल हुआ
तुमसे बिछड़ के मेरा कैसा हाल हुआ

दिन और रात का पता नहीं मुझे
अब तो हरसू हर पल तेरा ख्याल है
बस एक बात खटकती है दिल में
की आखिर ऐसा क्यों मेरे साथ हुआ
कौन सी कसम तोड़ी मैंने जो इस तरह
रहम न मेरे साथ हुआ
राखी शर्मा

Monday, September 22, 2014

जो तुम आ जाते एक बार

जो तुम आ जाते एक बार

जो तुम आ जाते एक बार
करती मैं तुमसे बाते हज़ार
चले गए मुझे यूँ अकेला छोड़ के
मुझसे यूँ मुंह मोड़ के
मुझे करना नहीं था तुम पे ऐतबार

ये सफर बहुत ही मुश्किल है
तनहा तनहा यूँ ही काटना
बहुत ही मुश्किल है मेरा
जीवन तुम्हारे बिन ढालना
मेरा तो जीना ही है अब बेकार

काश के ये मोहब्बत मैंने तुमसे
यूँ बेहद  तो न की होती
काश के मेरे बाग़ ऐ दिल ने
तेरे लिए यूँ आहें न भरी होती
जाने क्यों कर बैठी थी तुमसे मैं प्यार

हाथो की मेहन्दी को निहार जाओ
अपनी बातों का कोलाहल सुना जाओ
मेरी सुरमई आँखों में झांक तो लो
मेरी बात एक बार सुन तो लो
दिखा जाओ अपनी भी मोहिनी सूरत एक बार

खैर अपने जाने की वजह तो बता जाओ
एक बार ये ही बताने वापस आ जाओ
क्यों तुम्हे मेरी सदा सुने नहीं देती
क्यूँ मेरी ये तड़प दिखाई नहीं देती
आ जाओ कर लो फिर से आँखे चार
राखी शर्मा

Sunday, September 21, 2014

ख्वाबो में

आखिर क्यूँ तुम मेरे ख्वाबो में आती हो
क्यों तुम न होकर भी मुझे अपना अहसास दिलाती हो
क्या रिश्ता है मेरा तुमसे जो तुममानस पटल से लिपट जाती हो
बंद आँखों में भी तुम्हे देख केर मैं खूब रोती हूँ
तुम्हारे नेह के आंसुओं से अपनी पलके भिगोती हूँ
तुम्हारा वो कोमल स्पर्श पाने को मैं मचलती हूँ
क्यों ख़्वाबों में भी मैं तुम्हारा प्रेम पाने को तरसती हु
आखिर क्यों मैं तुमसे इतना प्यार करती हूँ
और नसीब में नहीं तुम तो क्यों मैं तुम्हारे लिए आहें भरती हूँ
शामिल मेरी जिन्दगी में तुम नहीं हो
पर ख्वाबों में हमेशा तुम्हारी  ही दुनिया बस्ती है
काश ये ख़्वाबों की बातें सच हो जाए
और मुझे वापस उस खुद से मेरी बेटी मिल जाए
राखी शर्मा

Saturday, September 20, 2014

मैं कौन हूँ

तू  ही बता कौन हु मैं
तेरे प्यार की बारिश की प्यास में
तपती  रेत हु मैं
तुझेचाँद समझकर हर पल निहारती
वो चकोर हु मैं
तू स्वाति नक्षत्र की बूंद है और तेरी प्यास लिए हुए वो चातक हु मैं
तेरे चहरे को देख कर जो तृप्त हो जाए
वो प्यास हु मैं
तेरे रोम रोम में बसने वाला अहसास हु मैं
तेरे दिल को जो आशना समझती है वो राहगीर हु मैं
तेरे प्यार को अपना अधिकार समझने वाली वो स्त्री हु मैं
तुझपे अपना अधिकार ज़माने वाली प्रेयसी हु मैं
सब कुछ छोड़ कर तुझसे श्रिंगार करने वाली प्रियतमा हु मै
इस जनम में तेरे  प्यार को तरसने वाली तेरी अधूरी कहानी हु मैं
रह रह कर जो तेरी आँख से बरसता है वो अश्को की रवानी हु मैं
तेरे दिल की धडकनों की रफ़्तार हु मैं
और जिसे तू कभी न भूल पायेगा वो तेरा प्यार हु मैं
राखी शर्मा

क्यूँ है

वक़्त बहुत हो गया तुझसे मिले पर इन आँखों में तेरी तस्वीर क्यों है
तोड़ दिया जिसने दिल मेरा और यकीं मोहबत से वो आज भी प्यार के काबिल क्यों है
जिसकी यादो को चुन चुन के जीवनसे निकाल दिया मैंने
वो फिर भी मेरी जिन्दगी में शामिल क्यों है
उसकी चाहत रास न आई फिर भी मेरे दिल पर उसका असर क्यों है
ख़तम हो गया है जो मेल उस से पर आज भी जीवंत उसका प्यार मुझमे क्यों है
वो है भी नहीं मेरे आस पास पर मेरी रगों में दौड़ता उसका इश्क क्यों है
हर सवाल का जवाब है मेरे पास पर उसके सवाल पर मेरी जुबान चुप क्यों है
रखा नहीं उस से कोई रिश्ता मैंने पर उसकी याद में डूबा ये दिल क्यों है
बर्बाद कर गया वो मुझे इस क़दर पर फिर भी उस पर ये रहम क्यों है
क़ैद कर दिया मुझे उसे अपनी यादो में पर इस कदर टूट कर इश्क क्यों है
हर रोज जलती हूँ कतरा कतरा उसकी याद में
आज भी उसकी यादों का मुझपे हक क्यूँ है।
राखी

Thursday, September 18, 2014

ऐ चाँद तुम तनहा क्यों रहते हो

ऐ चाँद तुम क्यों तनहा रहते हो
क्या तुम भी मेरी तरह बेचैन रहते हो
क्या तुम्हे भी अपने दिलदार के आने की आस है
क्या मेरी तरह ही तुम्हारी इन आँखों में उसके लिए प्यास है
क्या तुम भी उसके लिए पल मरते हो
क्या तुम भी मेरी तरह उसके दीदार को तरसते हो
क्या तुमने भी उसके इंतज़ार में पलके बिछायी हैं
क्या तुमने भी उसके लिए अश्को की झड़ी लगाई है
क्या तुम भी विराग वेदना में पल पल जलते हो
क्या तुम भी अपने लिए उसकी चाह करते हो
ऐ चाँद तुमने भी क्या हर पल उसको चाहा है
क्या मेरी तरह तुमने उसे अपने दिल और रूह में बसाया है
क्या तुम भी होके बेकरार उसकी राह तकत हो
क्या मेरी तरह तुम भी अपनी रूह को उसकी याद में नीलाम करते हो
ऐ चाँद तुम इतने तनहा क्यों रहते हो क्या मेरी तरह तुम भी दिलबर से मिलने को बेचैन रहते हो।
राखी शर्मा

Wednesday, September 17, 2014

रैनबसेरा

तेरा प्यार  एक रैन बसेरा ही तो है
जिसकी कसक खीच लाती है मुझे तेरे पास
और मैं बिन डोर खिची चली आती हु कुछ बल बिताने
तेरी बाँहों के उस रैनबसेरे में जो मुझे
पता है मेरा नहीं
पर फिर भी जो सुकून उन कुछ पलों में मिलता है
वो कहीं और कहाँ वो तो कहीं भी नहीं है
जिन्दगी के हसीं पल हैं गुजरते हैं तेरे साथ मेरे
जबकि मुझको भी ये पता है ये सब छण भंगुर है
पर फिर भी मुझे उन लम्हों को जीने की तलब है
और ये तलब तब तक रहेगी जब के मुझमे जान है
है तो तेरा प्यार रैनबसेरा पर इसमें ही मेरा जीवन है
और मैं कल्पना मात्र से पुलकित हो जाती हूँ
जब भी वहां रुकने की बात होती है
बस खुद से ये ही इल्तजा मेरी
कि इसका साया यूँ ही बना रहे।
राखी शर्मा