ऐ औरत तू अबला नहीं
तू तो सृष्टि की जनमदाता है
क्यों सहती है इतने अत्याचार
क्या तुझे खुद पे रहम नहीं आता ह
तू तो वो ज्वाला है जो पानी में आग लगा दे
सामने खड़ा हो छाए कोई भी तू पल में उसे ख़ाक बना दे
इस कलयुग में जबकि तेरी दुर्गति तेरी समाज ने कर दी
इज्ज़त और आबरू तेरी हेवानो ने अपने सुपर्द कर दी
तो तू भी बन चंडी कलिका दुष्टों का संहार कर
हाहाकार मच जाये कुछ ऐसे दुष्टों का नाश कर
जब तू अपना रूद्र रूप संसार को न दिखाएगी
तेरी असमर यूँही हमेशा खतरे में रह जाएगी
ले शमशीर हाथ में और कर से वार पे वार
ऐसे ही बचा पायेगी तू अपनी और बाकि स्त्रियों की लाज
राखी शर्मा
Saturday, September 6, 2014
बन जा चंडी काली
इंतज़ार
अजीब सी कशिश है तेरी आँखों में
जो मुझसे भुलाई नहीं जाती
इनमे डूबने की चाहत दिल से
मिटाई नहीं जाती
टूट कर दिल जार जार हो गया
ये दूरियां फिर भी मिट नहीं पाती
दूर होकर तेरी दुनिया से दिल
की दुनिया बसी नहीं जाती
कर देती है मजबूर जिन्दगी
पर तेरी यादें दिल से हटाई नहीं जाती
और परेशान हो जाती हु जब
तेरी तस्वीर आँखों से भुलाई नहीं जाती
इश्क इस कदर हो गया है तुझसे के
तेरे बिना दुनिया रास नहीं आती
अपना गम किसी से कह भी तो नहीं सकते
क्युकी परायों से ये बातें बताई नहीं जाती
तुम पास नहीं हो मेरे इस लिए
औरो से प्यास बुझाई नहीं जाती
हर चेहरे में तुझे ढूँढ़ते हैं
पर तेरी तस्वीर हमे कहीं नज़र नहीं आती
आ जाओ अब हमारे पास तुम के इंतज़ार की घड़ियाँ हमसे जी नहीं जाती
राखी
Friday, September 5, 2014
दर्द जिन्दगी है या जिन्दगी में दर्द है
जुदाई का एक नाम दर्द और मेरी जिन्दगी बस एक तुम
तुमसे दूर रहकर बन गयी है दर्द जिन्दगी
और तुम्हारे नाम पर जाने कितने दर्द दिए है इसने मुझे
तुम्हरे बिन तनहा अकेले जीने का दर्द
लम्हा लम्हा अपने आंसू पिने का दर्द
समझ में ही नहीं आया की जिन्दगी दर्द है या दर्द जिन्दगी
पर जो भी है बड़ी ही सिद्दत से इसने रुलाया है
कई अरसो से इसने गम को सिर्फ बढाया है
आलम ऐ तन्हाई इस कदर हमको अब भाने लगी है
की साथ में कोई और हो तो हमको कोफ़्त होने लगी है
ये कैसा मंजर मेरी आँखों ने दर्द का देखा है
हर बार तूने दिया जो जख्म है वो अनोखा है
क्या फर्क पड़ता है अब की जिन्दगी में दर्द है
जिस गम में जी रही हूँ मैं मेरा लहू भी अब सर्द है
बस एक नन्ही जी जान है जो इस शारीर में व्याप्त है
कब निकल जाये पता नहीं क्युकी ऐसे ही हालात है
मशरूफ हूँ अब तो मै इस जिन्दगी को जीने में
गम और आंसू लिए अपने इस सीने में
कुछ भी हो हमे जीने तो है ये जहर का घुट पीना तो है
अब तो तू जिन्दगी और तुही दर्द है
जिन्दगी में दर्द है चाहे दर्द में जिन्दगी है
राखी शर्मा
Thursday, September 4, 2014
तुम मैं और मन
कैसे हैं तुम मैं और मन
न तुम बदले न मैं और न ही मन
तुम भी मिलने को तरसते हो
मैं भी और मन भी
तुम भी आदत से मजबूर मैं भी मन भी
तुम भी मुझे सोचते हो मैं तुम्हे और हमारे मन भी
मैं भी प्यार में हु तुम भी प्यार में और ये मन भी
मैं भी सपने संजोती हु तुम भी और ये मन भी
मैं भी जुदाई में कुम्ल्हाई हु तुम भी और ये मन भी
प्यार की तडपन में तुम भी जलते हो मैं भी ये मन भी
कतरा कतरा जिन्दगी तुम भी जीते हो मैं भी मन भी
अधूरे अधूरे से हैं तुम भी मैं भी मन भी
राखी शर्मा
Wednesday, September 3, 2014
अहसास तेरे प्यार का
अह्स्सास तेरे प्यार का बहुत निराला है माँ
जितना भी सोचू मैं पैर ये अलबेला रिश्ता है माँ
जनम दिया तूने मुझे और लाड प्यार से पाला है
जा बाक्षर जब भी मैं अकेली होती हूँ
तूने दामन थामा है
और अब जब मैं विदा हो गयी ससुराल में
अब भी आती है तेरी यादें मेरे जहाँ में
दूर रहकर भी तुझे रिश्ता टूटा नहीं है मेरा
तुझसे प्यार और दुलार छुटा नहीं है मेरा
अहसास तेरे प्यार का कभी कम नहीं होगा माँ
न मेरे जीते जी और न ही मेरे मरने के बाद।
राखी
Tuesday, September 2, 2014
जिन्दगी का सफ़र
ये जिन्दगी का सफ़र कट तो रहा है
पर तेरे बिना जीने का वो मजा नहीं है
सफर तो है ये मगर अब कैसे कहूँ
कि जाने क्यों तू मेरा इसमें हमसफ़र नहीं है
पर फिर भी तेरी बातें मुझे हौसला देती हैं
तेरी सदाएं मुझे दुनिया से लड़ने की ताकत देती है
क्या कहु ये जिन्दगी का सफ़र न कट्ता
क्युकी तेरी हर दुआ मेरी मुसीबतों को को दूर कर देती हैं
हमसफ़र न सही मेरा सच्चा दोस्त ही बन जा
तुझे तो पता नहीं फर्क पड़े या नहीं मेरा तस्सवुर ही बन जा
और न जाने जिन्दगी किसकी कितनी बड़ी है
कुछ नहीं मेरे दुखों को रोकने वाली ढाल ही बन जा
इस जिन्दगी के सफर में मेरी बस ये ही तमन्ना है.........
राखी शर्मा
Monday, September 1, 2014
राज की बातें
तेरी मेरी राज़ की बातें
कुछ मीठी कुछ तकरार की बातें
कैसी ये हैं प्यार की बातें
हो जाये कुछ मनुहार की बातें
खोल दूं ये राज़ जो कयामत हो जाये
कैसे कह दूं कहीं बगावत न हो जाये
मैं कहती हूँ ये राज़ खोल दो
राज़ के जितने भी गिरह है आज खोल दू।
राखी